Twitter Country of Origin फीचर: क्या अब सोशल मीडिया पर सच सामने आएगा? सोशल मीडिया पर हम रोज़ अनगिनत अकाउंट्स देखते हैं कुछ हमारे आसपास के, कुछ बड़े इन्फ्लुएंसर्स और कुछ ऐसे जिनकी पहचान एक रहस्य की तरह होती है।
लेकिन एक्स (पूर्व ट्विटर) ने अब ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरी दुनिया में चर्चा छेड़ दी है। पहली बार किसी सोशल प्लेटफॉर्म ने यूजर अकाउंट्स की उत्पत्ति का देश सार्वजनिक रूप से दिखाना शुरू कर दिया है। यह बदलाव सिर्फ तकनीकी अपडेट नहीं, बल्कि ऑनलाइन भरोसे और पहचान को लेकर एक बड़े अध्याय की शुरुआत है।
We have a new heat map showing where most MAGA accounts on X operate 👀 pic.twitter.com/McarTTVh7o
— Right Wing Cope (@RightWingCope) November 23, 2025
Twitter Country of Origin फीचर क्या है?
एक्स ने अपने About This Account सेक्शन में एक नया फीचर जोड़ा है। अब हर यूजर प्रोफाइल के नीचे उस अकाउंट का मूल देश दिखाई देगा।
यह जानकारी तीन आधारों पर तय की जाती है,
- साइन-अप IP एड्रेस
- ऐप स्टोर रीजन
- एक्सेस हिस्ट्री
यह फीचर अब वैश्विक स्तर पर लागू हो चुका है और लाखों यूजर्स अपने और दूसरों के अकाउंट्स की लोकेशन चेक कर रहे हैं।
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एलन मस्क का उद्देश्य क्या है?
एक्स के मालिक एलन मस्क ने इस फीचर को Transparency Tool बताया है। उनका कहना है कि,
- यह फेक न्यूज और मिसइनफॉर्मेशन के खिलाफ मदद करेगा।
- यूजर्स किसी अकाउंट की विश्वसनीयता बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।
दूसरे शब्दों में, अब किसी अकाउंट की लोकेशन छुपाना पहले जैसा आसान नहीं होगा।

फीचर शुरू होते ही राजनीतिक विवाद
इस फीचर के शुरू होते ही सबसे ज्यादा हलचल राजनीतिक हलकों में देखने को मिली।
- कई अमेरिकी दक्षिणपंथी इन्फ्लुएंसर्स के अकाउंट्स ऐसे देशों से जुड़े दिखे जो यूएस से बाहर थे, जैसे नाइजीरिया, भारत, मैसेडोनिया और यूरोप के अन्य क्षेत्र।
- इससे यह सवाल पैदा हुआ कि क्या ये अकाउंट्स विदेशी प्रचार या राजनीतिक प्रभाव के अभियान का हिस्सा तो नहीं।
यह खुलासा सोशल मीडिया पर एक बड़े विवाद की वजह बना।
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Fox News का Germany कनेक्शन
सबसे चौंकाने वाली जानकारी Fox News के आधिकारिक अकाउंट को लेकर सामने आई।
- 2007 में जॉइन किया गया यह यूएस-आधारित मीडिया चैनल जर्मनी से जुड़ा दिखा।
एक्सपर्ट्स के अनुसार इसके संभावित कारण हो सकते हैं,
- ओवरसीज टीम मैनेजमेंट
- वीपीएन का उपयोग
- प्राइवेसी सेटिंग्स
Fox News ने सफाई दी कि उनका मुख्यालय अमेरिका में है, लेकिन ग्लोबल टीम के कारण ऐसा डेटा दिखाई दे सकता है। इसके बावजूद बहस थमी नहीं।
यूजर सेफ्टी और प्राइवेसी को लेकर चिंताएं
जहां कुछ लोग इस फीचर को सोशल मीडिया की पारदर्शिता का नया दौर मान रहे हैं, वहीं प्राइवेसी एडवोकेट्स चिंतित हैं।
उनके प्रमुख सवाल हैं,
- क्या जियो-पॉलिटिकल तनाव वाले देशों में यह फीचर यूजर्स के लिए खतरा बन सकता है?
- क्या इससे टार्गेटेड ट्रोलिंग या उत्पीड़न बढ़ सकता है?
यानी यह फीचर जितना उपयोगी लगता है, उतने ही नए जोखिम भी पैदा करता है।
भारत में क्यों बढ़ी चर्चा?
भारत में भी यह फीचर सुर्खियों में है।
- कई भारतीय इन्फ्लुएंसर्स के अकाउंट्स के पीछे यूएस या यूरोप कनेक्शन सामने आए।
- एक्स इंडिया के हेड का कहना है कि यह फीचर लोकल कंटेंट क्रिएटर्स को बढ़ावा देगा।
यूजर्स अब अपने पसंदीदा क्रिएटर्स और राजनीतिक अकाउंट्स की वास्तविक लोकेशन जानने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या यह सोशल मीडिया का भविष्य बदल देगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फीचर 2026 के मिडटर्म इलेक्शन्स से पहले मिसइनफॉर्मेशन कैंपेन्स को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या यह फीचर सच में पारदर्शिता का युग लाएगा या प्राइवेसी को खतरे में डालेगा? इसका उत्तर आने वाला समय ही देगा।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी सार्वजनिक रिपोर्ट्स और उपलब्ध फीचर अपडेट्स पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जागरूकता बढ़ाना है। यह लेख किसी व्यक्ति, संगठन या संस्था के प्रति किसी भी प्रकार के दावे या पक्षपात का प्रतिनिधित्व नहीं करता।
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